इस प्रक्रिया के अन्तर्गत प्रस्तावक विभाग द्वारा वन भूमि हस्तान्तरण प्रस्ताव गठित कर नोडल अधिकारी के माध्यम से 40 है0 तक भारत सरकार, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ एवं 40 है0 से अधिक भारत सरकार, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्ली को प्रेषित किये जाते हैं। 5 है0 से अधिक वन भूमि हस्तान्तरण प्रकरणों में भारत सरकार, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ के मुख्य वन संरक्षक की अध्यक्षता में राज्य सलाहकार समूह की बैठक आहूत की जाती हैं, जिसमें 5 है0 से अधिक के वन भूमि हस्तान्तरण के प्रकरणों की चर्चा की जाती हैं। भारत सरकार द्वारा दो चरणों में स्वीकृति प्रदान की जाती हैं। प्रथम चरण में कतीपय शर्तों के अधीन सैधान्तिक स्वीकृति जारी की जाती हैं, जिसमे अधोरोपित शर्तों का अनुपालन होने के पश्चात प्रकरण पर वन(संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा द्वितीय चरण में विधिवत स्वीकृति प्रदान की जाती हैं। एक है0 से अधिक के प्रकरणों में भारत सरकार द्वारा दुगुने अवनत वन भूमि में क्षतिपूरक वृक्षारोपण की धनराशि जमा करने एवं समस्त वन भूमि हस्तान्तरण प्रकरणों में एन०पी०वी की धनराशि जमा करने की अनिवार्य शर्त लगाई जाती हैं क्षतिपूरक वृक्षारोपण की धनराशि से सम्बन्धित वन प्रभाग के अन्तर्गत अवनत वन भूमि पर वनीकरण कार्य किया जाता हैं तथा एन०पी०वी की धनराशि को सम्बन्धित कोष क्षतिपूरक वृक्षारोपण निधि, प्रबन्धन एवं नियोजन प्राधिकरण(कैम्पा) में जमा किया जाता हैं, जिस का उपयोग राज्य के अन्तर्गत विभिन्न अवनत वन क्षेत्रों में वनीकरण हेतु किया जाना है। एक है0 से कम के प्रकरणों में भारत सरकार द्वारा सीधे विधिवत स्वीकृति प्रदान कर दी जाती हैं। भारत सरकार से विधिवत स्वीकृति में अधिरोपित शर्तों के अतिरिक्त राज्य सरकार की ओर से कुछ अन्य महत्वपूर्ण शर्तें अधिरोपित करते हुए वन भूमि हस्तान्तरण की विज्ञप्ति जारी की जाती हैं।

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