अविभाजित उत्तर प्रदेश राज्य में वन भूमि हस्तान्तरण प्रक्रिया अपेक्षाकृत
जटिल होने के कारण वन भूमि हस्तान्तरण मामलों में भारत सरकार से अन्तिम स्वीकृति प्राप्त
होने के पश्चात भी राज्य सरकार स्तर से कई माह तक शासनादेश निर्गत नहीं हो पाते थे,
जिसका प्रतिकूल प्रभाव उत्तराखण्ड क्षेत्र में क्रियान्वित की जाने वाली विभिन्न विकास
परियोजनाओं पर पडता था। उत्तराखण्ड राज्य के गठन के पश्चात वन भूमि हस्तान्तरण से सम्बन्धित
जटिल प्रक्रिया के सरलीकरण की आवश्यकता महसूस की गयी। शासनादेश संख्या- 104/ 26/ प्र.स.आ.व.ग्रा.वि.
दिनांक 4-1-2001 द्वारा इस प्रक्रिया को सरलीकृत किया गया, जिसके फ़लस्वरुप भारत सरकार
से अन्तिम स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात यथाशीघ्र शासनादेश जारी किये जा रहे हैं,
जिससे विकास योजनाओं को समय से पूरा करने व उनकी लागत सीमित रखने में सहायता मिली हैं।
उत्तराखण्ड राज्य गठन के पश्चात वन भूमि हस्तान्तरण
के प्रकरणों के शासनादेश जारी किये जा चुके हैं। जिससे विकास योजनाओं को समय से पूरा
करने व उनकी लागत सीमित रखने में सहायता मिली हैं।