पर्याप्त भोजन एवं ईधन की आपूर्ति :- जन संपर्क अधिकारी के अतिरिक्त प्रत्येक अभियान दल में एक चिकित्सक सहित अधिकतम 10 सदस्य होंगे । इसके अतिरिक्त दो अन्य पर्वतारोहियों को निर्धारित अतिरिक्त शुल्क जमा करने के उपरान्त अनुमति दी जा सकती है। अधिकतम चार पोर्टर/ गाइड/ शेरपा अभियानदल के प्रति पर्वतारोही सदस्या के साथ बेस कैम्प तक जा सकते हैं । किसी भी तरह बेस कैम्प से पीक कैम्प तक जाने हेतु केवल दो पोर्टर/ गाइड/ शेरपा ही अनुमन्य होंगे।

  किसी रूट से विशेष पर्वत चोटी हेतु पर्वतारोहण अभियान को प्रति कैलेण्डर माह में अधिकतम दो बार तक सीमित किया जायेगा । प्रत्येक कलैण्डर वर्ष में किसी पर्वत चोटी विशेष अथवा इसके समीपस्थ चोटी हेतु बारह पर्वतारोहण अभियान नही आयोजित किया जायेगा । भारतीय पर्वतारोहण प्रतिष्ठान (फाउण्डेशन) दल के सदस्यों की संख्या, पोर्टर/ गाइड/ शेरपा की संख्या तथा पर्वतारोहण अभियान की आवृति को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किये गए उक्त प्राविधान अनुसार नियंत्रित करेगा । प्रत्येक अभियान दल को भारतीय पर्वतारोहण प्रतिष्ठान (फाउण्डेशन) के माध्यम से मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को उनके अभियान दल के बारे में समस्त सूचना का अक्षरशः पालन करना होगा। प्रदेश सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों (संलग्नक-प्प् में दिये गये अनुसार) स्थानीय टूर- आपरेटर, गाइड, सहायक एवं पोर्टर को प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से पंजकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना होगा ।

   उत्तराखण्ड राज्य में पर्वतारोहण अभियान के दौरान पालन किये जाने वाली शर्ते एवं नियमः-

1. सहायक दल द्वारा उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में अभियन के दौरान साथ जाने वाले पोर्टर, सहायक, गाइड में से कम से कम पचास प्रतिशत स्थानीय लोग लिए जायेंगे ।

2. प्रत्येक अभियान दल, अजैविक (असड़नशील ) कचड़ों को पर्वतारोहण चैक पोस्ट पर वापस/ हस्तान्तरित करेगा एवं इस आशय का आश्वासन देगा कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा इस संबंध में समय-समय पर बनाये गये नियमों का पालन करेगा।

3. अभियान दल के सदस्यों को अभियान के दौरान घटित किसी दुर्घटना/ मृत्यु अथवा सम्पत्ति की हानि हेतु राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं होगी।

4. अभियान दल द्वारा उत्तराखण्ड प्रदेश में प्रवास के दौरान समस्त संगत प्रचलित नियमों/ कानूनों का पालन सुनिश्चित करना होगा।

5. प्रत्येक अभियानदल को अभियान हेतु निर्धारित रूट से मार्ग तय करना एक बाध्यता होगी । विशेष परिस्थिति में किसी भी प्रकार के विचलन की अनुमति मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखण्ड द्वारा प्रदान की जायेगी। अभियान दल के प्रमुख को इस प्रकार के विचलन यथा शीघ्र उस क्षेत्र के स्थानीय प्रभागीय वनाधिकारी की जानकारी में लाना होगा।

6. अभियान दल अपने साथ ऐसा कोई भी हथियार अथवा हानि पहुंचाने वाले पदार्थ को नहीं ले जायेगा जिससे वन्य जीव एवं उनके वास स्थलों को क्षति पहुंचती हो या किसी वन्य जीव को मार सके । पर्वतारोहण टीम, अभियान के दौरान किसी भी प्रकार के अवैध शिकार, अग्नि घटना, आग जलाना या किसी भी वन्य जीव, पेड़ जड़ी-बूटी अथवा साइन बोर्ड को नहीं हटायेगी या नुकसान करेगी ।

7. अभियान दल अपने साथ पर्याप्त मात्रा में मिट्टी का तेल/ एल0पी0जी0, भोजन बनाने एवं अन्य उपयोग हेतु रखेगी। अभियान के दौरान ईंधन के रूप में लकड़ी जलाना पूर्णतया प्रतिबंधित है ।

8. अभियान दल सभी प्रकार के जल को प्रदूषित करने से बचायेगा।

9. प्रत्येक अभियान दल को पर्याप्त संख्या में थैले/ कन्टेनर रखने होंगे, जिसमें उत्पादित अजैविक कचड़ें को ट्रांजिट एवं बेस कैम्प से वापस लाकर पर्वतारोहण अभियान चैक पोस्ट पर वन विभाग को हस्तान्तरित किया जायेगा।

10. अभियान दल को मार्ग में उपलब्ध संसाधनों ( ठहरने, भोजन, परिवहन हेतु ) जैसे वन विश्राम भवन, पर्यटक विश्राम भवनों तथा स्थानीय ग्रामीणों के पास उपलब्ध होमस्टे सुविधाओं आदि का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

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