4. रणनीति :-
4.1 वन आवरण में वृद्धि :-
उत्तराखण्ड में यद्यपि 64.8 प्रतिशत भू-भाग में अभिलिखित वन क्षेत्र हैं, परंतु वनाच्छादित
क्षेत्र मात्र 43.5 प्रतिशत है। इस प्रकार 21.3 प्रतिशत भाग, जो कि 11,000 वर्ग
किमी0 है, में यदि आधा क्षेत्र हिमाच्छादित, बलुई, पथरीला मान लिया जाय तो भी लगभग
5,500 वर्ग किमी० क्षेत्र ऐसा है जिसको वन आवरण में वृद्धि हेतु लिया जा सकता है। ऐसे
भू-भाग में प्राकृतिक पुनरोत्पादन/ वनीकरण के माध्यम से, भूदृष्य को ध्यान में रखते
हुए, हरित आवरण में वृद्धि हेतु विस्तृत कार्ययोजना बनाई जायेगी तथा वित्तीय संसाधनों
की उपलब्धता अनुसार जन सहयोग तथा विभागीय प्रयासों से इसे क्रियान्वित किया जायेगा।
4.2 वृक्षारोपण के मूल उद्देश्यों एवं विद्यमान
वनस्पति को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश के पूरे भू-भाग को निम्न प्रकार तीन क्षेत्रों
(Regions) में बांटा जा सकता है :- मैदानी/ तराई भाबर क्षेत्र
(Plains/ Terai Bhabar Region) : इसमें मुख्यतः साल, शीशम, आदि के प्राकृतिक वन तथा
यूकेलिप्टस, पौपलर, सागौन आदि के वृक्षारोपण हैं। इन क्षेत्रों को प्राथमिकता पर उत्पादन
वानिकी हेतु प्रबन्धित किया जायेगा। मध्य हिमालयन क्षेत्र (Middle Himalayan Region)
: यह क्षेत्र सामान्यतया चीड़, बांज आदि प्रजातियुक्त हैं। इन क्षेत्रों में विविध प्रयोजनों
हेतु (Multi-Purpose Plantation) कार्य हेतु प्रबन्धित किया जायेगा। उच्च स्थलीय/ उप-हिमाद्रि
क्षेत्र (High Altitude/ Sub-Alpine Region) : इस क्षेत्र में जुनीपर्स, भोजपत्र आदि
प्रजाति हैं। जिन्हें वन आवरण में वृद्धि हेतु लिया जायेगा।
4.3 रोपण हेतु प्रजातियों का वर्गीकरणः-
अलग-अलग क्षेत्रों (Regions) में पर्यावरणीय महत्व तथा स्थानीय उपयोगिता,
एवं विपणन व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए स्थल की उपयुक्ततानुसार विविध मिश्रित प्रजातियों
का रोपण निम्न प्रकार किया जायेगा :-
प्रजातियों का मिश्रण :-
1. उच्च वितान 20 प्रतिशत
2. आयपरक प्रजातियां ईंधन, चारा, औषधीय, सुगन्ध, फल, खाद्य-संपूरक (Supplement) बांस,
वैकल्पिक ईंधन आदि 80 प्रतिशत निर्देशों का अनुपालनः- प्रदेश में संचालित समस्त योजनाओ
के अन्तर्गत वृक्षारोपणों में उपरोक्तानुसार वितान को ध्यान में रखते हुए प्रजातियों
का चयन किया जायेगा।
4.4 कृषि वानिकीः- प्रदेश
में पारिस्थितिक (इको सिस्टम) उपयुक्तता के आधार पर व्यापक एवं सघन वृक्षारोपण किया
जायेगा। पर्वतीय क्षेत्र में गैर प्रकाष्ठीय वन उपज, जड़ी-बूटी तथा मैदानी क्षेत्र में
औद्योगिक प्रजाति एवं सुगन्ध पौधों को निजी भूमि में कृषिकरण हेतु बल दिया जायेगा।
4.5 जनसहभागिता :- वृक्षारोपण
के कार्य में निजी एवं राजकीय क्षेत्र के उपक्रमों, स्वयंसेवी संस्थाओं, वन पंचायतों,
ग्राम पंचायतों एवं समस्त सरकारी विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की जायेगी।