4.13.5  सुरक्षा हेतु यथासंभव स्थानीय ग्रामीणों का सहयोग, जैविक सुरक्षा बाढ़ आदि विधियों को उपयोग में लाया जायेगा। अपरिहार्य स्थिति में ही दीवालबंदी/ तारबंदी की जायेगी। 

4.14 जल-संचय साधनः- प्रत्येक क्षेत्र में समुचित नमी कायम रखने हेतु जल-संचय साधनों (Rain Water Harvesting) को बढ़ावा दिया जायेगा। इस हेतु राज्य केन्द्र सरकार के संस्थानों द्वारा प्रतिपादित नवीनतम/ प्रमाणित विधियों को उपयोग में लाया जायेगा। 

4.15 वनीकरण हेतु उपलब्ध क्षेत्रों का सूचीकरणः- राष्ट्रीय स्तर पर ऑल इण्डिया सौयल एण्ड लैण्ड यूज सर्वे (A.I.S.L.U.S) द्वारा भूमि का इसकी उपयोगिता के अनुसार सर्वेक्षण जलागमवार किया गया है। वृक्षारोपण हेतु उपलब्ध क्षेत्रों का सूचीकरण करते समय इस सर्वेक्षण का लाभ लिया जा सकता है। समस्त क्षेत्रों की श्रेणीवार सूची बनाकर प्रजातियों के चयन तथा क्षेत्रों की उपलब्धता की जानकारी ली जायेगी और साथ ही अधिक संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर वृक्षारोपण हेतु चिन्हित किया जायेगा। प्रत्येक वन प्रभाग में लैंड बैंक (Land Bank) का गठन करते हुए वृक्षारोपण के लिए विभिन्न विभागों की योजनाओं में उपलब्ध धनराशि का समन्वय किया जायेगा। यह क्षेत्र प्रत्येक वर्ष घोषित किया जायेगा।

4.16  वन पंचायतों में वृक्षारोपणः- प्रस्तर 4.3 के प्राविधानों के अन्तर्गत वृक्षारोपण किया जायेगा।

4.17  पारम्परिक एवं बरगद आदि प्रजाति के वृक्षों का रोपण : पारम्परिक प्रजातियों जैसे बरगद, पीपल आदि के वृक्षों के रोपण को बढ़ावा देने हेतु प्रत्येक पौधशाला में कुल उगाये गये पौधों का पांच प्रतिशत ऐसे पौधों के लिए निर्धारित किया जायेगा। 

4.18  नैसर्गिक रूप से खाली सीर्नों वृक्षारोपणः- नैसर्गिक रूप से खाली सीर्नों जैसे बुग्याल, दलदली क्षेत्र, घास के मैदान, रौखड़ इतयादि में वृक्षारोपण नहीं किया जायेगा।
4.18.1 बुग्याल संरक्षणः- बुग्यालों को कन्जर्वेशन रिजर्व (Conservation Reserve) के रूप में प्रबन्धित किया जायेगा। 
4.18.2  ताल संरक्षणः- कन्जर्वेशन रिजर्व (Conservation Reserve) के रूप में प्रबन्धित करते हुए यहां पर ईको-टूरिज्म स्थल (Eco Tourisem Site) विकसित किये जायेंगे। 

4.19 वन्य जीव प्रबन्धन के दृष्टिकोण से वृक्षारोपणः- वन्य जीव संरक्षण की दीर्घकालीन रणनीति (Strategy) के अनुसार वन्यजीव वासस्थल को विकसित करने के दृष्टिकोण से संवेदनशील वन क्षेत्र के सीमावर्ती वनों में वृक्षारोपण तदनुसार ही किया जायेगा। इसी प्रकार विभिन्न संरक्षित क्षेत्र को एक दूसरे से जोड़ने के लिए कौरिडोर(Corridors)  के निर्माणार्थ वृक्षारोपण किया जायेगा। कन्जर्वेशन रिजर्व (Conservation Reserve) के रूप में यहॉ पर ईको-टूरिज्म स्थल (Eco-Tourism Site) विकसित किये जायेंगे। 

4.20 वनों की उत्पादकता बढ़ानाः-
4.20.1
 प्रदेश के वनों की उत्पादकता बढ़ाने हेतु नई प्रजातियों को लगाने (Introduce) करने हेतु अनुसंधान वृत द्वारा गहन अध्ययन किया जायेगा।
4.20.2  विभिन्न वनोपज आधारित उद्योगों को प्रकाष्ठ की आपूर्ति हेतु युकेलिप्टस तथा पौपलर के वृक्षारोपण की उतपादकता में वृद्धि हेतु विशेष प्रयास किये जायेगें। इस हेतु अच्छी गुणवत्ता के पौध तैयार करने हेतु अच्छी गुणवत्ता के प्रमाणित बीज तथा क्लोनल पौधों को अपनाया जायेगा। Top