4.20.3 रोपावनियों की वर्तमान सुरक्षा विधियों में सुधार एवं
परिवर्तन लाने हेतु विभिन्न अन्य मॉडल्स का परीक्षण कर नवीनतम एवं प्रभावी विधि को
अपनाया जायेगा।
4.20.4 युकेलिप्टस रोपण क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ाने की दृष्टि
से रोटेशन को कम करने तथा सम्पूर्ण रोटेशन अवधि तक सघन सुरक्षा की व्यवस्था करने संबंधी
पहलू पर भी विचार किया जायेगा।
4.21 प्राकृतिक वनों में अधोरोपणः-
प्राकृतिक वनों में मुख्य प्रजाति के अलावा यह प्रजातियों एवं क्षेत्र में नैसर्गिक
रूप से पाये जाने वाले पेड़ पौधों, झाड़ियों का अधोरोपण किया जायेगा।
4.22 वृक्षारोपण संहिताः- उपरोक्त
निर्देशों को फील्ड स्तर पर तकनीकी मार्गदर्शन हेतु विभाग द्वारा वृक्षारोपण संहिता
बनाकर प्रसारित की जायेगी।
4.23 अनुश्रवण एवं मूल्यांकनः-
4.23.1 वृक्षारोपणों की सफलता सुनिश्चित करने एवं नियमित गुणात्मक
सुधार हेतु विभागीय तथा वाह्य एजेन्सी के द्वारा एक बार अनुश्रवण एवं मूल्यांकन किया
जायेगा। तीन वर्ष तक विभाग/ वन पंचायत यह कार्य करेंगे। प्रत्येक तीन वर्ष के बाद वाह्य
ऐजेन्सी मूल्यांकन करेगी।
4.23.2 अग्रिम बिक्री एवं सुरक्षाः- कामर्शियल प्लान्टेशन
स्थलों (Commercial Plantation) को उपभोक्ता इकाइयों को अग्रिम बिक्री (Advance Sale)
कर उनके द्वारा सुरक्षा (Protection) का कार्य कराया जायेगा।
5. राज्य वृक्षारोपण नीति के क्रिन्यावित की समीक्षा
:- राज्य स्तर पर वृक्षारोपण नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा प्रत्येग
वर्ष मा0 वन मंत्री जी की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय समिति द्वारा की जायेगी।
6. राष्ट्रीय वन नीति 1988 एवं उत्तराखण्ड वन नीति
2001 से सम्बन्ध :- राज्य वृक्षारोपण नीति, राष्ट्रीय वन नीति
1988 एवं उत्तराखण्ड वन नीति 2001 के प्राविधानों के अधीन रहेगी।