वन विभाग में प्रशिक्षण का इतिहास काफी पुराना है। पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश में भारत वर्ष में सर्वप्रथम गोरखपुर के फरेन्दा रेंज में 1936 में वन रक्षक प्रशिक्षण स्कूल खोला गया था। स्वतत्रंता प्राप्ति के पश्चात् इस पर काफी ध्यान दिया जाने लगा। उत्तराखण्ड के गठन के पूर्व प्रदेश में प्रशिक्षण के निम्नलिखित केन्द्र विद्यमान थेः-
1. वानिकी प्रशिक्षण संस्थान, हल्द्वानी।
2. वन रक्षक प्रशिक्षण केन्द्र, कालसी।
3.. वन रक्षक प्रशिक्षण केन्द्र, जैती।
उत्तराखण्ड गठन के पश्चात् विश्व बैंक वानिकी परियोजना के अन्तर्गत रामपुर मण्डी जनपद देहरादून में वन रक्षक प्रशिक्षण हेतु नये परिसर का निर्माण हुआ और कालसी प्रशिक्षण केन्द्र नव निर्मित भवन में 2002 से कार्य करने लगा। राज्य में सुरक्षित वन्य जीव क्षेत्र का क्षेत्रफल कुल वनों के क्षेत्रफल का 12 प्रतिशत है एवं यह राज्य वन्य जीवों से भरा हुआ है। अतः वन्य जीव पर विशेष ज्ञान देने हेतु कालागढ़ में विश्व बैंक परियोजना की सहायता से एक प्रशिक्षण केन्द्र वर्ष 2000 में खोला गया। वर्ष 2002 में ही वानिकी प्रशिक्षण संस्थान हल्द्वानी का नाम वानिकी प्रशिक्षण अकादमी किया गया।
वानिकी प्रशिक्षण अकादमीः- यह अकादमी वन प्रशिक्षण के लिये भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। वर्ष 1978 से ही विभिन्न राज्यों के रेंज अधिकारी यहॉं प्रशिक्षण प्राप्त करते आ रहे हैं। वर्ष 2000 से रेंज अधिकारी प्रशिक्षणार्थियों की संख्या निम्नवत रहीः-
| वर्ष |
प्रशिक्षणों की संख्या |
प्रशिक्षणार्थियों की
संख्या |
| 2000-02 | 1 | 30 |
| 2004-06 | 1 | 13 |
| 2006-09 | - | - | 2010-12 | 1 | 30 |
इसके अतिरिक्त अकादमी द्वारा बदलते हुए परिवेश को देखते हुये निम्नलिखित प्रशिक्षण वन निगम एवं जलागम/ वन पंचायतों के लिये आयोजित किये गयेः-
वर्ष 2000 से वन पंचायत सरपंच/ सदस्य प्रशिक्षणार्थियों की संख्याः-
| वर्ष | प्रशिक्षणों की संख्या |
प्रशिक्षणार्थियों की संख्या |
योग | |
| पुरुष | महिला | |||
| 2001-02 | 17 | 270 | 44 | 314 |
| 2002-03 | 14 | 122 | 6 | 128 |
| 2003-04 | 27 | 426 | 34 | 460 |
| 2004-05 | 26 | 290 | 23 | 313 |
| 2005-06 | 21 | 219 | 11 | 230 |
| 2006-07 | 17 | 145 | 29 | 174 |
| 2007-08 | 32 | 57 | 374 | 431 |
| 2008-09 | 19 | 565 | 57 | 622 |
| 2009-10 | 10 | 214 | 2 | 216 |