4. औषधि एवं सुगन्ध प्रजातियॉं 
       उत्तराखण्ड को हर्बल राज्य घोषित किया गया है तथा औषधीय एवं सुगन्ध प्रजातियों के विकास के लिए वन विभाग द्वारा निम्न कदम उठाये गये :-
(a) कृषकों की निजी भूमि पर जड़ी बूटियों का रोपण किया गया है।
(b) ग्रामीणों को जड़ी बूटी उगाने का प्रशिक्षण दिया गया।
(c) एफ0डी0ए0 के अन्तर्गत ग्राम वन समितियों द्वारा उनके क्षेत्रों में प्रस्तावित जड़ी बूटी रोपण।

जैट्रोफ़ा-आर्थिक लाभ का आकलन

क्र०सं० विवरण प्रति है0 दर
1. लगाए गए पौधों की संख्या(2.2 मीटर) 2500 पौध
2. जैट्रोफ़ा रोपण के 100 प्रतिशत पौधों से उपज मिलेगी 2500 पौध
3. तीसरे वर्ष से उत्पादन शुरु मानते हुए प्रति पेड़ 1.5 किलोग्राम बीज का उत्पादन 3750 किलोग्राम(37.50 कुन्तल)
4. प्रति हे० आय(वर्तमान बाज़ार मूल्य 3 रुपये प्रति किलोग्राम) 11,250/- प्रति हे०
5. तीन वर्ष तक जॆट्रोफ़ा पौध रोपण एंव सुरक्षा पर किया गया व्यय 30,000 /-
प्रति हे०
6. 2 वर्ष में रोपण पर हुए व्यय की प्रतिपूर्ति 11250 रु 3 33,750/- रुपये
7. पाँचवे वर्ष में प्रति हे० लाभ 3750/- रुपये
8. छठे वर्ष से प्रतिवर्ष प्रति हे० लाभ 2500 रु 1.5 किलोग्राम  रु 3 रुपये प्रति किलो  11,250/- रुपये

     जैट्रोफा का उपयोग साबुन, सौन्दर्य प्रसाधन, मोमबत्ती आदि उद्योगों में तथा भूमिसुधार व भूमिकटाव रोकने में किया जाता है। इसके अतिरिक्त वैज्ञानिक अनुसंधानों के आधार पर प्रकृति में सहज उपलब्ध जैट्रोफा पौधे के बीजों का तेल ईंधन के सबसे उपयुक्त विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। उत्तराखण्ड में जैट्रोफा कर्कस अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों में एवं घाटी वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। प्राकृतिक रूप से एवं वन क्षेत्रों में यह प्रजाति कहीं कहीं उपलब्ध है परन्तु जैट्रोफा के बड़े एवं एकल क्षेत्रा वन के रूप में उत्तराखण्ड में नहीं पाये जाते हैं। Top