1. वन पंचायतें:- उत्तराखण्ड राज्य में वन पंचायतों का लम्बा इतिहास रहा है तथा स्थानीय समुदाय वन रूपी प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में भागीदार रहे हैं। अतः इस संस्था को और सुदृढ़ीकृत किया जा रहा है। अब तक 12089 वन पंचायतों का गठन किया जा चुका है तथा सम्पूर्ण 14,633 ग्रामों में वन पंचायतें गठित करने का लक्ष्य है।
2. वन विकास अभिकरणः- ग्राम वन समितियों/ अन्य स्थानीय संस्थाओं के संघ के रूप में वन विकास अभिकरण (एफ0डी0ए0) का गठन किया गया है। एफ0डी0ए0 वन प्रभाग के स्तर पर बनाई हुई रजिस्टर्ड सोसाईटी है। यह योजना सामुदायिक भागीदारी पर आधारित व्यवस्था के अन्तर्गत संचालित की जाती है, अर्थात इस योजना के कार्य संयुक्त वन प्रबन्ध समिति द्वारा करवाये जाते हैं। परियोजना के अन्तर्गत ग्रामों को योजना एवं क्रियान्वयन की इकाई माना गया है। एफ0डी0ए0 हेतु अपेक्षित धनराशि राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत शतप्रतिशत धनराशि भारत सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जाती है।
सम्पूर्ण भारत वर्ष में वन विकास अभिकरण के माध्यम से राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम की सफलता के क्षेत्र में उत्तराखण्ड राज्य को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
उत्तराखण्ड राज्य में राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत जहाँ तक वर्ष 2001-02 में एक एफ0डी0ए0 तथा वर्ष 2002-03 में तीन एफ0डी0ए0 प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए थे वहीं पर वर्ष 2003-04 एवं 2004-05 में विशेष प्रयास कर क्रमशः 16 एवं 8 एफ0डी0ए0 प्रोजेक्ट भारत सरकार से स्वीकृत कराए गए। वर्ष 2007-08 से 11वीं पंचवर्षीय योजना काल हेतु एफ0डी0ए0 प्रोजेक्टस भारत सरकार की स्वीकृति हेतु भेजे गये हैं जिनके शीघ्र स्वीकृत होने की आशा है। प्रश्नन अब यह किया जा रहा है कि जहाँ तक सम्भव हो वानिकी से सम्बन्धित सभी कार्य सहभागिता के द्वारा गठित वन विकास अभिकरण या वन पंचायत के माध्यम से किया जाये।