वन विभाग का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणो के सह प्रबंधन से वन उत्पादों का सत्त उत्पादन है
ताकि राज्य के आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण सुरक्षा बनी रहे। बढ़ते हुए जैविक दबाव
एवं बदलते मौसम के कारण प्राकृतिक पुर्नजनन होने एवं उनके स्थापित होने में काफी कठिनाइयां
होती है। अत: वृक्षारोपण / भूक्षरण की रोकथाम हेतु निम्नाकिंत योजनायें क्रियान्वित
की जाती है।
आयोजनागत पक्ष में प्रगति :-
कार्य की दृष्टि से विभाग द्वारा संचालित महत्वपूर्ण योजनाओं का विवरण निम्नवत: है
:-
बागान योजनायें :-
वन विभाग द्वारा आयोजनागत पक्ष में बागान की निम्न योजनायें
कार्यान्वित की जा रही है :-
बहुउद्देशीय वृक्षारोपण :- इस
योजना मेंsX;kjgohaपंचवर्षीय योजना (2007-12) में 169281.13 लाख परिव्यय प्रस्तावित है।यह
योजना वर्ष 2005-06 से कार्यों की समरुपता के कारण आरक्षित एवं सिविल सोयम वनों में
बहुउद्देशीय (राज्य सेक्टर) में शामिल कर दी गई है।
वनों की अग्नि से सुरक्षा :-
उत्तराखण्ड के वनों में अग्नि दुर्घटनायें कभी-कभी हो जाती है। वनों को आग की क्षति
को कम करने एवं वनों को आग लगने पर त्वरित सूचना के आदान-प्रदान एवं उन पर नियंत्रण
करने के उद्देश्य से चतुर्थ पंचवर्षीय योजना काल से यह योजना कार्यान्वित की जा रही है। X;kjgohaपंचवर्षीय
योजना (2007-12) में रु0 4357.49 लाख का परिव्यय प्रस्तावित
है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम :- यह
योजना वानिकी कार्यों में लगे श्रमिकों को सस्ते दरों पर खाद्यान उपलब्ध कराने के लिये
संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्यान कार्यक्रम की सहायता से टिहरी, उत्तरकाशी तथा
चमोली जनपदों में चलाई जा रही है।इस योजना हेतु
X;kjgoh पंचवर्षीय योजना में रु0 322.27 लाख का परिव्यय प्रस्तावित
है।
अधिक उच्च प्राणि उद्यान एवं वन चेतना / मनोरंजन
केन्द्रों की स्थापना :- इस योजना में पूर्व में चली आ रही पर्वतीय
क्षेत्रों में पर्यटन स्थलों का सौंन्दर्यीकरण योजना का विलीन कर लिया गया है। X;kjgoh पंचवर्षीय
योजना में रु0 873.03 लाख का प्रस्तावित है।